Sunday, April 24, 2016

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस Indian History Short Notes in Hindi 33 Page Free PDF

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस

यदि आपने भारतीय इतिहास की कम तैयारी की है या आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास के केवल अतिमहत्वपूर्ण प्रश्नों को ही याद करना चाहते हैं तो यह अति महत्वपूर्ण 33 पृष्ठों के फटाफट नोटस आपकी बेहद मदद कर सकते हैं।
प्रश्न-उतर एंव उनकी व्याख्या के रूप में यह छोटे नोटस इतने अच्छे हैं कि आप इनको डाउनलोड करने के बाद कमेंट में थैंक यू लिखना भूल ही नहीं सकते।
इस लिंक पर क्लीक करके डाउनलोड करें:-
यदि आप विस्तृत तैयारी के लिये नोटस चाहते हैं तो निम्न लिंक से मुफत डाउनलोड कर सकते हैंः-
तथा इन 33 पृष्ठों के नोटस की शैली की बढी पुस्तक लेना चाहते हैं तो इस लिंक पर जा सकते हैंः-  
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Thursday, March 17, 2016

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 Chandu journey of Indian history part 6

Chandu journey of Indian history part 6 
इस कहानी को भाग एक से पढने के लिये निम्न लिंक पर क्लीक करेंः-
चन्दू इतिहास यात्रा भाग एक
चिंकी ने वापस लौटने के पश्चात अगले दिन स्कूल में चन्दू को उसकी टाईम मशीन वापस कर दी । 

विद्यालय के सातवें कालांश में विद्यार्थियों को पुस्तकालय ले जाने का नियम था उसमें चन्दू ने पुस्तकालयध्यक्ष महोदय से पूछा ‘‘सर क्या अपने पुस्तकालय में विदेशी इतिहास का कोई अनुवादित ग्रन्थ है’’ ? दरअसल चन्दू की मशां थी कि वो विदेशी भाषा के इतिहास ग्रन्थ की सहायता से किसी विदेशी संस्कृति का काल जानकर उसकी यात्रा कर लेगा । 


पुस्तकालय अध्यक्ष रेंचो सर उसकी बात सुनकर मुस्कराए तथा बोले ‘‘चन्दू क्या तुम ईरानी भाषा के प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ का हिन्दी अनुवाद पढ़ना चाहोगे ? 
 चन्दू के सहमति दर्शाने पर सर ने उसे एक पुस्तक निकाल कर दी जिसका नाम था ‘‘अवेस्ता’’ मूल रूप से ईरानी भाषा में लिखे इस ग्रन्थ को पढ़कर चन्दू आश्चर्यचकित हो उठा क्यों कि इसकी ज्यादातर बातें ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलती थी । 
 अब चन्दू के समझ में आया कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को (जो ऋग्वैदिक सभ्यता के निवासी थे) मध्य एशिया (बैक्द्रिया या ईरान के आस पास के क्षेत्र) से आया हुआ मानते थे । 
चन्दू चिल्लाया ‘‘चिंकी आओ में तुम्हें सबूत दिखाता हूं कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को मध्य एशिया (बैक्द्रिया) से आया मानते थे ।’’ चिंकी भी वैदिक सभ्यता पर एसाइनमेंट लिख रही थी इसलिए चन्दू की बात से उत्साहित होकर दोड़कर आयी तब चन्दू ने बताया कि ईरानी भाषा का प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ अपने ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलता जुलता है । 
 चिंकी बोली ‘‘परन्तु चन्दू बाल गंगाधर तिलक तो आर्यों को उतरी ध्रुव से आया मानते थे ।’’ 
चन्दू हॅंसा ‘‘चिंकी जहां भालु भी मुश्किल से मिलते हैं ऐसे क्षेत्र से आर्य कैसे आए होगें ।’’ 
 चिंकी बोली ‘‘हां वो तो है स्वामी दयानदं सरस्वती ने वैदिक सभ्यता का अध्ययन किया था वो आर्यों को तिब्बत से आया मानते थे ।’’ 
 तब चन्दू बोला चलो इतिहास की मैडम से विषय की जानकारी लेते है। वो मिलकर इतिहास की मैडम श्रीमती लोपामुद्रा अय्यर के पास गये तथा उनसे आर्यों के उद्गम स्थल के बारे में प्रकाश डालने की प्रार्थना की । 
 श्रीमती लोपामुद्रा बोली ‘‘यह सही है कि श्री बालगंगाधर तिलक ने आर्यों को तिब्बत व श्री दयानदं सरस्वती ने उतरी ध्रुव का निवासी बताया है परन्तु इस बारे में अन्य मत भी है जैसे डा. अविनाश चन्द दास इन्हे सप्त सैन्धव प्रदेश से आया बताते हैं तो गंगानाथ झा ब्रह्यर्षि देश से आया बताते हैं । 
 चन्दू बोला ‘‘पर मैडम उतरी ध्रुव में तो भालु रहते हैं सप्त सैन्धव देश व ब्रह्यर्षि देश कौनसे देश है ये कहाॅं पर स्थित हैं ? मैडम हंसी ‘‘चन्दू ये तो मैं भी नहीं जानती पर इस बारे में विदेशी विद्ववानों के भी मत हैं नेहरिगं व प्रो. गार्डन आर्यों को दक्षिणी रूस से आया मानते हैं प्रो. पेन्का जर्मनी से आया मानते हैं ।
 वस्तुत अधिकाशं विद्ववान प्रो. मैक्समूलर की बातों से सहमत है कि आर्य मध्य एशिया के निवासी थे । 
 इतने में स्कूल की छुट्टी हो गयी । 
 शेष अगले भाग में जो 20 दिन -30 दिन में प्रकाशित होगा तब तक श्रखंला आपको कैसी लगी कमेटं में अवश्य दर्ज करें ।
Avesta relation with righveda ancient Indian history notes in Hindi, chandu history journey.

Thursday, February 18, 2016

केवल 30 दिनों में भारतीय इतिहास की तैयारी करने हेतु कैप्सूल श्रखंला का कैप्सूल प्रथम Prepare Indian history in 30 Days ( Hindi me) Capsule 1

जब आप बीमार हो जाते हैं तो चिकित्सक आपको ठीक होने के लिये कैप्सूल देता है कि एक कैप्सूल रोज खाना हेै व तीस दिन तक खाने से उल्लेखनिय फर्क महसुस होगा। 

क्या आप सभी 30 कैप्सूल एक साथ खाकर एक ही दिन में स्वस्थ हो सकते हैं? 
क्या आप 2-3 कैप्सूल खाकर स्वस्थ हो सकते हैं? 
आप मानते हैं कि इन प्रश्नों का उतर ना में ही है तो लिजिये आज हम आपको भारतिय इतिहास के 90 कैप्सूल की श्रखंला देते हैं। प्रत्येक कैप्सूल में 15 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न है जो विगत सालों में किसी न किसी प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे गये हैं। 
प्रत्येक कैपसूल में 15 अति महत्वपूर्ण प्रश्न अत्यंत सरल तरीके से दिये गये हैं जिनको याद रखना अत्यंत सरल है। 
 तो आप किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास की झटपट तैयारी करना चाहते हैं तो इन कैप्सूलों में से रोज 3 कैप्सूल के 15*3=45 प्रश्न याद कर लेवें तो 30 दिन के कम समय में आप 1350 अति महत्वपूर्ण प्रश्न याद कर लेगें तथा ज्यादा आत्मविश्वास से प्रतियोगी परीक्षा में भाग ले सकेगें। 
लिजिये हाजिर है कैप्सूल श्रंखला का कैप्सूल 1 तथा इसके 15 प्रश्नः- 
1. हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग से सबंधित थी। 
2. सिन्धु घाटी सभ्यता में घोड़े के अवशेष नहीं मिलते हैं। 
3. पाण्डीचेरी में फ्रासं का उपनिवेश था। 
4. नृत्य करते हुये नटराज की मूर्ति का संबध चोल वंश से था। 
5. महाबलीपुरम मंदिर पल्लव वंश से संबधित है। 
6. पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम थी। 
7. प्रथम रेलवे लाईन लार्ड डलहौजी ने 1853 में मुम्बई से ठाने के बीच बिछाई थी। 
8. नादिरशाह ने कन्नौज पर चढाई नहीं की थी। 
9. राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरूद्व कार्य किया। 
10. हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो ने यंग बंगाल मूवमेंट की स्थापना की थी। 
11. लार्ड कर्जन के कार्यकाल में कलकता में विक्टोरिया हाल का निमार्ण हुआ था। 
12. भारत छोड़ो आंदोलन नेतृत्व विहीन विद्रोह कहलाता है। 
13. एडवर्ड ल्यूटिऐन्स व एडवर्ड बेकर ने नई दिल्ली की रूपरेखा बनायी।
14. बिहार राज्य का नाम बौद्व मठ से बना है। 
15. बाबरनामा बाबर की आत्मकथा के रूप में है।

अगला कैप्सूल भाग 15 दिवस में प्रकाशित होगा।
हिन्दी में मुफत पीडीएफ नोटस यहां से डाउनलोड करेंः- 
हिन्दी की भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक हेतु यहां जावेंः- 

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Thursday, January 7, 2016

हिस्ट्री आफ राजपुताना वोल्यूम । पं गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखित पीडीएफ के रूप में पढें। History of Rajputana By Pandit Gourishankar Hirachand Ojha PDF ( Hindi)

राजस्थान राजपुतों का देश रहा है यहां का इतिहास बहुत ही गौरवशाली होने के साथ साथ मध्यकालीन भारत के पुरे इतिहास की जानकारी सजोंयें हुये है अतः आप यदि राजस्थान स्लेट, राजस्थान स्कूल व्याख्याता, राजस्थान के इतिहास से सबंधित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहें हैं आपके लिये पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखे गये राजस्थान के इतिहास के सभी भागों को पढना अति आवश्यक है।
   साथ ही आई.ए.एस व अन्य राज्यों के इतिहास के विधार्थी भी इस पुस्तक को अवश्य पढें क्यों कि यह केवल राजपुताना का इतिहास नहीं है इसमें मध्यकालीन भारत के इतिहास की जानकारी इतनी रोचक भाषा में है कि आप पढकर रोमांच व आनंद महसुस करेगें जो गाइडों से पढने में नहीं आ सकता।
    जैसा कि मेरा मानना है प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये पासबुक्स व गाईडों का सहारा न लेकर इन प्राचीन दुलर्भ पुस्तकों को पढना आपको ज्यादा तैयारी करवा सकता है।
   यह पुस्तक निम्न लिंक पर जाकर पढ सकते हैं व पीडीएफ के रूप  में ले सकते हैं।
यह 496 पेज की पुस्तक 20 एमबी की है इसलिये डाउनलोड होने व ओपन होने में आपके इन्टरनेट की स्पीड के अनुसार समय लग सकता है।
Link:-
हिस्ट्री आफ राजपुताना वोल्यूम । पं गौरीशंकर हीराचंद ओझा हिन्दी

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Thursday, December 17, 2015

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा Travels in India By When Tsang Hindi pdf

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा 
प्रिय साथियों
आज में आपको 1972 में प्रकाशित एक बहुत ही दुर्लभ पुस्तक का अध्ययन करवाना चाहता हुं इस पुस्तक का नाम है चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा
इस पुस्तक के 443 पेजों में हिन्दी में सन 629 से 645 तक ही चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा का अत्यंत रोचक वर्णन है।
इतिहास की पुस्तकों का रटटा मारने से आप जो सीख नहीं सकते वो इस पुस्तक को पढकर सीख सकते हैं।
यह पुस्तक मूल रूप  से Travels in India By When Tsang का हिन्दी अनुवाद है जो आप निम्न लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं 
Download Travels in India By When Tsang Hindi pdf
अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकेंः-
हुंमायुनामा हिन्दी में।

Rajasthan history (Itihas) in Hindi pdf

or 
You may also understand Hindi itihas by read this free series of history:-
चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा।
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