Tuesday, November 22, 2016

भारतीय इतिहास नोटस कैप्सूल -2 Indian History Notes Hindi Capsule 2

मेरे विगत आलेखों में मैने आपको बताया था आप भारतीय इतिहास के व्यापक सिलेबस को देखकर धबराएं नही तथा इसे 10-10 प्रश्नों के कैप्सूलों के रूप में बांट लेवे तथा एक-एक कैप्सूल याद करते जावें तो इससे आप भारतीय इतिहास पर अपनी मजबूत पकड़ बना सकतें है।

ऐसा इसलिये सभवं होता है कि 1-1 कदम चलने से हजारों मीलों कि दुरी पार हो जाती है तो आज इस श्रखलां का कैप्सूल सं. 3 प्रस्तुत है आपने यदि विगत 2 कैप्सूल डाउनलोड नही किये हैं तो पहले उनको निम्न लिकों से डाउनलोड करके याद कर लेवें:

भारतीय इतिहास नोटस कैप्सूल -2:Indian History Notes Hindi Capsule 2  
1.शेरशाह के समय में राज्य की आय का मुख्य स्त्रोत लगान था । 
2.शेरशाह की लगान व्यवस्था ‘‘रैयतबाड़ी’’ कहलाती थी ।
3.अकबर के समय का पहला विद्रोह 1564 में उजबेकों ने किया था । 
4. बीरबल की मुत्यु 1586 में ब्लुचियों के  विद्रोह में हुयी थी ।
5. जैन धर्म के आचार्य ‘‘हरीविजय सुरि’’ को जगतगुरू की उपाधि अकबर ने दी थी
6. मुहम्मद सैय्यद ;मीर जुमलाद्ध नामक फारसी व्यापारी नें शाहजहाॅं को कोहिनुर हीरा      भेंट किया था ।
7. वीरजी बोहरा ‘‘मुगलकाल में सूरत का एक प्रसिद्ध व्यापारी था 
8.जहांगीर ने रविवार व व्हस्पतिवार को पशु हत्या बंद करने की आज्ञा दी थी 
9. मुगल चित्रकला का सर्वाधिक विकास जहाॅंगीर के काल में हुआ था 
10. थियोफिजीकल सोसायटी की स्थापना 1875 में मैडम ब्लावत्सकी तथा कर्नल आल्काॅट नें न्यूयार्क में थी 
उपरोक्त 10 बिन्दूओं को याद करने के साथ साथ आप इतिहास को रोचक कहानी के रूप में निम्न लिकं पर जाकर पढ सकतें हैः
इतिहास का यह ब्लोग आपको कैसा लगता है अपने विचार कमेंट मे अवश्य दर्ज करें ताकी आपके सुझावों के आधार पर इस ब्लोग को नया रूप दिया जा सके।
आप इतिहास के अपने पंसदीदा टोपिक को कैप्सूल के रूप में बना कर मुझे  mahesh2073@yahoo.com पर शेयर कर सकते हैं चुनिदां कैप्सूलों को इस ब्लोग पर प्रकाशित किया जावेगा।
मेरे सिविल सेवा की तैयारी करने वाले पाठकों को आधुनिक भारत के इतिहास की तैयारी हेतु स्पैक्ट्रम की निम्न पुस्तक अवश्य पढने का सुझाव दिया जाता हैः-

Thursday, July 21, 2016

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 7 Chandu journey of Indian history part 7

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 से आगे । इस कहानी को भाग एक से पढने के लिये निम्न लिंक पर क्लीक करेंः- 

चन्दू इतिहास यात्रा भाग एकअगले दिन प्रातः जब चन्दू सोकर उठा तब चाय पीते-2 उसके मन में कल स्कूल में हूयी घटनाओं के विचार चल रहे थें तब अचानक उसके मन में ऋगवैदिक काल की यात्रा करने का विचार आया ताकि कल जो उसका चिंकी के साथ विचार विमर्श हुआ था उसके बारे में ओर ज्यादा जानकारी हो सके । 


 चन्दू ने अपनी टाईम मशीन में ऋगवैदिक सभ्यता का काल 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. फीड कर दिया तथा आखें बन्द करके वैदिक काल में जाने की प्रतिक्षा करने लगा ।
 जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुयी तब चन्दू ने आखें खोल कर टाईम मशीन के स्क्रीन पर देखा तो वहा एरर मैसेज फलैश हो रहा था कि ‘‘ आप 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. एक साथ 500 वर्ष का समय पहीं भर सकते कोई एक वर्ष भरें ।’’ 
 तब चन्दू ने 1200 ई. पू. भरा तथा पलक झपकते ही अपने आप को एक विशाल उफनती हुयी नदी के किनारे पाया चन्दू ने मन में सोचा ‘‘ शायद यही सरस्वती नदी होगी ।’’ पास ही एक पर्वत शिखर था जिसका नाम मूजवन्त संस्कृत में लिखा था चन्दू को याद आया कि इतिहास में पढाया गया था कि ऋगवेद में हिमालय ओर उसकी चोटी मूजवन्त का उल्लेख मिलता है
 अचानक सामने से एक विशाल लश्कर आता दिखायी दिया तो चन्दू ने अदृश्य होने का बटन दबा दिया तथा लश्कर में शामिल हो गया । समूह के लोग संस्कृत में बात कर रहे थे तथा सौभाग्य से चन्दू की संस्कृत काफी मजबूत थी फिर भी उनकी संस्कृत भाषा वर्तमान में चन्दू के पाठयक्रम में पढाये  जाने वाली संस्कृत से काफी क्लीष्ट प्रतित हो रही थी । 
 यह लश्कर किसी ‘‘विशपती’’ का था चन्दू को याद आया कि वैदिक काल में कई गावों का समूह विश कहलाता था तथा इसका मुखियाॅ ‘‘विशपती’’ होता था । ये विशपती किसी अनु नामक कबीले से सबंधित थे जो जनपति से मिलने जा रहे थे । 
 चन्दू को इतिहास की मैडम श्रीमती लोपामुद्रा अययर की बातें याद रही थी कि विशों का का समूह जन होता था तथा जन का अधिपती जनपति होता था । 
चन्दू लश्कर के साथ जनपति के दरबार में पहुच गया जहा बहुत से विशपति थे तथा राजा ( जनपति ) को गोप्ता जनस्य तथा पुराभेता आदि नामों से सबोंधित कर रहे थे । चन्दू ने राजदरबार में सभा, समिति, विदथ तथा गण जैसी कबीलाई परिषदें देखी जिनमें महिलाए भी उच्च पदों पर आसीन थी । 
 चन्दू घूमता-2 सैनिक विभाग में पहुच गया वहा उसने शर्ध, व्रात और गण आदि सेना की ईकाईया देखी तथा काफी समय व्यतित हो जाने व भुख लगने से उसने टाईम मशीन में वापस जाने का बटन दबा दिया । 
 शेष अगले भाग में जो 20 दिन -30 दिन में प्रकाशित होगा तब तक श्रखंला आपको कैसी लगी कमेटं में अवश्य दर्ज करें ।

Sunday, April 24, 2016

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस Indian History Short Notes in Hindi 33 Page Free PDF

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस

यदि आपने भारतीय इतिहास की कम तैयारी की है या आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास के केवल अतिमहत्वपूर्ण प्रश्नों को ही याद करना चाहते हैं तो यह अति महत्वपूर्ण 33 पृष्ठों के फटाफट नोटस आपकी बेहद मदद कर सकते हैं।
प्रश्न-उतर एंव उनकी व्याख्या के रूप में यह छोटे नोटस इतने अच्छे हैं कि आप इनको डाउनलोड करने के बाद कमेंट में थैंक यू लिखना भूल ही नहीं सकते।
इस लिंक पर क्लीक करके डाउनलोड करें:-
यदि आप विस्तृत तैयारी के लिये नोटस चाहते हैं तो निम्न लिंक से मुफत डाउनलोड कर सकते हैंः-
तथा इन 33 पृष्ठों के नोटस की शैली की बढी पुस्तक लेना चाहते हैं तो इस लिंक पर जा सकते हैंः-  
Best Indian history notes in question - answer and explanation style in Hindi, this 33 page short pdf in Hindi give you a quick preparation of Indian history .
Click this link to download these free indian history short question bank notes in pdf:-

Thursday, March 17, 2016

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 Chandu journey of Indian history part 6

Chandu journey of Indian history part 6 
इस कहानी को भाग एक से पढने के लिये निम्न लिंक पर क्लीक करेंः-
चन्दू इतिहास यात्रा भाग एक
चिंकी ने वापस लौटने के पश्चात अगले दिन स्कूल में चन्दू को उसकी टाईम मशीन वापस कर दी । 

विद्यालय के सातवें कालांश में विद्यार्थियों को पुस्तकालय ले जाने का नियम था उसमें चन्दू ने पुस्तकालयध्यक्ष महोदय से पूछा ‘‘सर क्या अपने पुस्तकालय में विदेशी इतिहास का कोई अनुवादित ग्रन्थ है’’ ? दरअसल चन्दू की मशां थी कि वो विदेशी भाषा के इतिहास ग्रन्थ की सहायता से किसी विदेशी संस्कृति का काल जानकर उसकी यात्रा कर लेगा । 


पुस्तकालय अध्यक्ष रेंचो सर उसकी बात सुनकर मुस्कराए तथा बोले ‘‘चन्दू क्या तुम ईरानी भाषा के प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ का हिन्दी अनुवाद पढ़ना चाहोगे ? 
 चन्दू के सहमति दर्शाने पर सर ने उसे एक पुस्तक निकाल कर दी जिसका नाम था ‘‘अवेस्ता’’ मूल रूप से ईरानी भाषा में लिखे इस ग्रन्थ को पढ़कर चन्दू आश्चर्यचकित हो उठा क्यों कि इसकी ज्यादातर बातें ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलती थी । 
 अब चन्दू के समझ में आया कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को (जो ऋग्वैदिक सभ्यता के निवासी थे) मध्य एशिया (बैक्द्रिया या ईरान के आस पास के क्षेत्र) से आया हुआ मानते थे । 
चन्दू चिल्लाया ‘‘चिंकी आओ में तुम्हें सबूत दिखाता हूं कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को मध्य एशिया (बैक्द्रिया) से आया मानते थे ।’’ चिंकी भी वैदिक सभ्यता पर एसाइनमेंट लिख रही थी इसलिए चन्दू की बात से उत्साहित होकर दोड़कर आयी तब चन्दू ने बताया कि ईरानी भाषा का प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ अपने ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलता जुलता है । 
 चिंकी बोली ‘‘परन्तु चन्दू बाल गंगाधर तिलक तो आर्यों को उतरी ध्रुव से आया मानते थे ।’’ 
चन्दू हॅंसा ‘‘चिंकी जहां भालु भी मुश्किल से मिलते हैं ऐसे क्षेत्र से आर्य कैसे आए होगें ।’’ 
 चिंकी बोली ‘‘हां वो तो है स्वामी दयानदं सरस्वती ने वैदिक सभ्यता का अध्ययन किया था वो आर्यों को तिब्बत से आया मानते थे ।’’ 
 तब चन्दू बोला चलो इतिहास की मैडम से विषय की जानकारी लेते है। वो मिलकर इतिहास की मैडम श्रीमती लोपामुद्रा अय्यर के पास गये तथा उनसे आर्यों के उद्गम स्थल के बारे में प्रकाश डालने की प्रार्थना की । 
 श्रीमती लोपामुद्रा बोली ‘‘यह सही है कि श्री बालगंगाधर तिलक ने आर्यों को तिब्बत व श्री दयानदं सरस्वती ने उतरी ध्रुव का निवासी बताया है परन्तु इस बारे में अन्य मत भी है जैसे डा. अविनाश चन्द दास इन्हे सप्त सैन्धव प्रदेश से आया बताते हैं तो गंगानाथ झा ब्रह्यर्षि देश से आया बताते हैं । 
 चन्दू बोला ‘‘पर मैडम उतरी ध्रुव में तो भालु रहते हैं सप्त सैन्धव देश व ब्रह्यर्षि देश कौनसे देश है ये कहाॅं पर स्थित हैं ? मैडम हंसी ‘‘चन्दू ये तो मैं भी नहीं जानती पर इस बारे में विदेशी विद्ववानों के भी मत हैं नेहरिगं व प्रो. गार्डन आर्यों को दक्षिणी रूस से आया मानते हैं प्रो. पेन्का जर्मनी से आया मानते हैं ।
 वस्तुत अधिकाशं विद्ववान प्रो. मैक्समूलर की बातों से सहमत है कि आर्य मध्य एशिया के निवासी थे । 
 इतने में स्कूल की छुट्टी हो गयी । 
 श्रखंला आपको कैसी लगी कमेटं में अवश्य दर्ज करें ।
क्रमशः----- शेष Link for next part
चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 7 (click on link to read next)
मे पढे । 
Avesta relation with righveda ancient Indian history notes in Hindi, chandu history journey.

Thursday, February 18, 2016

केवल 30 दिनों में भारतीय इतिहास की तैयारी करने हेतु कैप्सूल श्रखंला का कैप्सूल प्रथम Prepare Indian history in 30 Days ( Hindi me) Capsule 1

जब आप बीमार हो जाते हैं तो चिकित्सक आपको ठीक होने के लिये कैप्सूल देता है कि एक कैप्सूल रोज खाना हेै व तीस दिन तक खाने से उल्लेखनिय फर्क महसुस होगा। 

क्या आप सभी 30 कैप्सूल एक साथ खाकर एक ही दिन में स्वस्थ हो सकते हैं? 
क्या आप 2-3 कैप्सूल खाकर स्वस्थ हो सकते हैं? 
आप मानते हैं कि इन प्रश्नों का उतर ना में ही है तो लिजिये आज हम आपको भारतिय इतिहास के 90 कैप्सूल की श्रखंला देते हैं। प्रत्येक कैप्सूल में 15 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न है जो विगत सालों में किसी न किसी प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे गये हैं। 
प्रत्येक कैपसूल में 15 अति महत्वपूर्ण प्रश्न अत्यंत सरल तरीके से दिये गये हैं जिनको याद रखना अत्यंत सरल है। 
 तो आप किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास की झटपट तैयारी करना चाहते हैं तो इन कैप्सूलों में से रोज 3 कैप्सूल के 15*3=45 प्रश्न याद कर लेवें तो 30 दिन के कम समय में आप 1350 अति महत्वपूर्ण प्रश्न याद कर लेगें तथा ज्यादा आत्मविश्वास से प्रतियोगी परीक्षा में भाग ले सकेगें। 
लिजिये हाजिर है कैप्सूल श्रंखला का कैप्सूल 1 तथा इसके 15 प्रश्नः- 
1. हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग से सबंधित थी। 
2. सिन्धु घाटी सभ्यता में घोड़े के अवशेष नहीं मिलते हैं। 
3. पाण्डीचेरी में फ्रासं का उपनिवेश था। 
4. नृत्य करते हुये नटराज की मूर्ति का संबध चोल वंश से था। 
5. महाबलीपुरम मंदिर पल्लव वंश से संबधित है। 
6. पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम थी। 
7. प्रथम रेलवे लाईन लार्ड डलहौजी ने 1853 में मुम्बई से ठाने के बीच बिछाई थी। 
8. नादिरशाह ने कन्नौज पर चढाई नहीं की थी। 
9. राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरूद्व कार्य किया। 
10. हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो ने यंग बंगाल मूवमेंट की स्थापना की थी। 
11. लार्ड कर्जन के कार्यकाल में कलकता में विक्टोरिया हाल का निमार्ण हुआ था। 
12. भारत छोड़ो आंदोलन नेतृत्व विहीन विद्रोह कहलाता है। 
13. एडवर्ड ल्यूटिऐन्स व एडवर्ड बेकर ने नई दिल्ली की रूपरेखा बनायी।
14. बिहार राज्य का नाम बौद्व मठ से बना है। 
15. बाबरनामा बाबर की आत्मकथा के रूप में है।

अगला कैप्सूल भाग 15 दिवस में प्रकाशित होगा।
हिन्दी में मुफत पीडीएफ नोटस यहां से डाउनलोड करेंः- 
हिन्दी की भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक हेतु यहां जावेंः- 

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