Thursday, December 17, 2015

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा Travels in India By When Tsang Hindi pdf

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा 
प्रिय साथियों
आज में आपको 1972 में प्रकाशित एक बहुत ही दुर्लभ पुस्तक का अध्ययन करवाना चाहता हुं इस पुस्तक का नाम है चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा
इस पुस्तक के 443 पेजों में हिन्दी में सन 629 से 645 तक ही चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा का अत्यंत रोचक वर्णन है।
इतिहास की पुस्तकों का रटटा मारने से आप जो सीख नहीं सकते वो इस पुस्तक को पढकर सीख सकते हैं।
यह पुस्तक मूल रूप  से Travels in India By When Tsang का हिन्दी अनुवाद है जो आप निम्न लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं 
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चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा।
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Tuesday, June 16, 2015

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 5 Chandu Journey of Indian History Part 5

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 4 से आगे
Chandu Journey of Indian History Part 5
चिकीं ने देखा वह एक किलेबंद शहर मे है जिसके चारो तरफ खाई खुदी हुई है वहा बडे बडे कच्ची मिटटी के बने हुए मकान थे कुछ मकान गोलाकार गडडे नुमा थे । चिंकी जोरवे संस्कृति के सबसे बड़े नगर दैमाबाद को देखकर आश्चर्य चकित थी कि नगर मे लोग घोडे की सवारी नही कर रहे थे इससे उसको समझ मे आया कि ताम्रपाषण काल के लोग घोडे से परिचित नही थे ।
 औरते लाल मिटटी से पुती हुई काली चित्रकारी की हुई टोटी लगी हुई मिटटी की मटकियो मे पानी ला रही थी बर्तनो पर डीजाईन समान्तर लाईनो के रूप मे ज्यामितिय बने थे । 
एक जगह चिंकी ने देखा कि काफी स्त्री पुरूष इकठठे हुए है नजदीक से देखने पर ज्ञात हुआ कोई मर गया था मृतक को एक बडे कलश मे रखकर घर के आंगन मे दफनाया जा रहा था कब्र मे भी मिटटी की हंडिया व तांबे की कुछ वस्तुएं रखी जा रही थी जो उनकी बातचीत से लग रहा था कि मृतक के परलोक मे काम आवे इसके लिए ये वस्तुए मृतक के साथ मे दफनायी जा रही थी मृतक का शरीर उत्तर दक्षिण की तरफ रखा गया था । चिंकी को एक आश्चर्य यह भी था आज भी ठेठ महाराष्ट्र की संस्कुति दैमाबाद की जोरवे संस्कुति से मेल खा रही थी । खासकर के लाल मिटटी पर काली ज्यामिति वाले टोटी नुमा बर्तन आज भी महाराष्ट्रा के गांवो मे चिंकी ने देखे थे । 
( चिंकी बम्बई की रहने वाली थी उसे आपने मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म मे देखा होगा ) । अन्य वस्तुए जो चिंकी ने दैमाबाद मे देखीः- मछली पकडने के काटे मातृदेवी की पूजा व वृषभ की मूर्ति की पूजा ( जो वर्तमान काल मे भी शिव-पार्वती व गौ-पूजन के रूप् मे की जाती है ) कांसे की वस्तुए एक पाचं कमरो का मकान देखा जिसमे 4 कमरे आयताकार व एक वृताकार था ।
 अब चिंकी ने टाईम मशीन मे अन्य समान्तर शहरो के नाम देखे तो राजस्थान के तीन ताम्रपाषण कालीन शहरो के नाम उसे फलैश होते हुए दिखे । 1 गिलुण्ड 2 आहर ( तम्बाबती ) 3 गणेश्वर चिंकी दैमाबाद का यात्रा से उब चुकी थी इसलिए उसने गणेश्वर की यात्रा हेतु टाईम मशीन का बटन दबा दिया । पलक झपकते ही चिंकी ने अपने आपको प्राचीन गणेश्वर स्थल मे पाया उसने देखा कि तांबे की वस्तुओ की आपूर्ति हडप्पा सभ्यता के लोगो को करनेे के लिए व्यापारी लोग एकत्रित हुए है।
 चिंकी को घर वापस लौटने की जल्दी थी फिर भी उसने मशीन की तरफ अन्य समान्तर शहरो को देखा तो गुन्नेरिया, मालबा व कायथा ( मध्यप्रदेश ) नाम भी फलैश हो रहा था परन्तु चिंकी मालबा गुन्नेरिया व कायथा नही गयी क्योंकी एक तो वह काफी थक चुकी थी दुसरे उसे याद भी था कि मालबा मे ताम्रपाषाण काल के सबसे उत्कृष्ठ मृदभाण्ड पाये जाते है । व गुन्नेरिया मे सबसे अधिक मात्रा मे ताबे व चांदी की वस्तुए मिली है यदपि उसकी इच्छा गुन्नेरिया ( मध्यप्रदेश ) मे मिले 424 तांबे के औजार व 102 चांदी की पतरे नुमा वस्तुए देखने की परन्तु उसे घर पहुचने की जल्दी भी इसलिए उसने टाईम मशीन पर वापसी का बटन दबा दिया ।
क्रमशः----- शेष चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 मे पढे ।
Next part:-
http://www.indianhistorynotes.in/2016/03/6-chandu-journey-of-indian-history-part.html
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Friday, October 17, 2014

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा-4 Chandu Journey of Indian History Part 4

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 से आगे 
चन्दू बोला नहीं चिंकी तुम भुल गयी इतिहास की मैडम ने बताया तो था कि पिकलीहल में शंख के बने घर पाये गये हैं।
चन्दु से यात्रा वृतान्त सुनकर चिंकी की भी इच्छा होने लगी कि वो भी भारतीय इतिहास के ताम्र पाषाण काल की यात्रा करके आये। उसने चन्दू से उसकी टाईम मशीन एक दिन के लिए उधार मांग ली। चन्दू ने सहर्ष उसे देते हुए कहा देखो चिंकी उस काल के लोग यदपि मानव शिकार नहीं करते थे फिर भी तुम्हें अनजान देख कर तुम पर हमला कर सकते हैं। इसलिए इस मशीन में एक अदृश्य बटन भी है तुम उसी का इस्तेमाल करके यात्रा करना जिससे तुम उन्हे देख सकोगी पर वे तुम्हे नहीं देख सकेगें। 

चिंकी बहुत खुश हुयी उसने चन्दू से घडी लेकर अपनी कलाई पर बांध ली तथा मशीन में 2100ई.पू. का समय भर दिया तो स्क्रीन पर अनेक ओप्शन फलैश होने लगे। 
चिंकी स्क्रोल करके इन ओप्शन को पढने लगी । 
मशीन में लिखा था आपने जो समय भरा है वो जोर्वे संस्कृति या ताम्र पाषाण काल का समय है इसके इतने स्थल यात्रा के लिए उपलब्ध है आप जोर्वे संस्कृति के कौनसे स्थल की यात्रा करना चाहेगें 
 जोर्व (महाराष्ट्र) नेवासा (महाराष्ट्र) दैमाबाद (महाराष्ट्र) इनामगांव (महाराष्ट्र) सोनगांव (महाराष्ट्र) चन्दोली (महाराष्ट्र) नबदाटोली (महाराष्ट्र) अहार (ताम्बवती भी कहते हैं) 
 इतने ओप्शन देखकर चिंकी ने अपने दिमाग पर जोर लगाया तो उसे याद आया कि इतिहास की मैडम कहती थी कि जोर्वे संस्कृति के स्थलो में सबसे बडा दैमाबाद है तो उसने दैमाबाद ओप्शन का चयन कर लिया तथा साथ ही अदृश्य होने का बटन भी दबा दिया। 
क्रमश......

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 5 Chandu Journey of Indian History Part 5

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Thursday, September 25, 2014

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 Chandu Journey of Indian History Part 3

चन्दू समझ गया कि वो मध्य पाषाणकाल में आ गया है। उसने अपनी घड़ी में बटन दबाया तो वो एक स्थान पर था जहां भी प्राचीन लोग अपने पालतु पशुओं के साथ दिखे चन्दू ने अपनी टाईम मशाीन में इस स्थान का नाम देखा तो लिखा था सराय नाहर। 
चन्दू बेहद रोमांचित था क्यों कि इस टाईम मशीन से तो उसे इतिहास जैसा बोर लगने वाला विषय अपने आप याद होता जा रहा था उसे सराय नाहर पढते ही याद आ गया कि सराय नाहर तथा महदहा जगह जो यूपी के प्रतापगढ जिले में है से मध्य पाषाण काल के मानवों का पहला शारिरीक अस्थिपंजर मिला था।
 अगली बार नेक्सट बटन दबाने पर चन्दू कोल्डिहवा नामक स्थान पर आ गया वहां के लोग चावल खा रहे थे पहली बार चन्दू ने अपनी इतिहास यात्रा में ऐसा स्थल देखा जहां चावल का प्रयोग हो रहा था। अब लोग हिसंक नहीं थे इसलिये चन्दू भी उनमें घुलमिल कर चावल खाने लगा। उबले हुये फिके चावल चन्दू को अच्छे तो नहीं लगे पर यह अवश्य याद हो गया कि इलाहाबाद के पास कोल्डिहवा स्थल से चावल के प्राचीनतम साक्ष्य किस प्रकार मिले होगें। 

 चन्दू पेदल ही चल रहा था उसने अपनी टाईम मशीन की स्क्रीन पर इस काल के अन्य स्थलों को देखा तो बुर्जहोम गुफकराल चिरांद पिकलीहल तथा मेहरगढ लिखे थे। 

चन्दू ने एक एक करके इन स्थानों की यात्रा कि तो देखा कि बुर्जहोम में गडडे जैसे घर थे लोग खेती भी कर रहे थे प्रत्येक घर में कुता पाला हुआ था परन्तु यह क्या चन्दू एक कुते के चीखने की आवाजें सुन कर पसीज गया उसने पता किया तो उसका दिल जैसे बेठने लगा लोगों ने बताया कि यहां बुर्जहोम में मालिक के मर जाने पर कुते को भी साथ ही दफनाया जा रहा है। 
चन्दू का मन बुर्जहोम से भर गया उसने नेक्सट स्थल का बटन दबा दिया तथा चिरांद में आ गया। चिरांद के लागों के पास हिरण की हडिडयों के बने बहुत से उपकरण थे। 
चन्दू वापस अपने काल में आ गया अगले दिन वो स्कूल गया तो उसने अपने साथियों को अपनी ईतिहास यात्रा के बारे में बताया उसकी सहपाठी चिंकी को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ ।
 चिंकी बहुत तेज दिमाग की लड़की थी उसे आपने मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म में देखा होगा। चिकीं ने चन्दू की परीक्षा लेने की ठान ली ताकि पता चले कि वो सचमुच किसी ईतिहास यात्रा से जाकर आया है या नहीं ।
 लंच टाईम में चिंकी ने चन्दू को पूछा “चन्दू तुम पिकलीहल भी गये थे क्या?” 
चन्दू बोला “ओफ कोर्स” 
चिंकी बोली “तो वहां के घर भी गडडे में बने हुये थे क्या?” 
चन्दू ने कहां “नहीं चिंकी वहां तो मैने शंख के बने हुये घर देखे।” 
चिंकी बोली “तुं मुझे मामू तो नही बना रहा” 

क्रमश......अगला भाग Chandu journey of Indian History part 4 पढें।

Thursday, September 18, 2014

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 2 Chandu Journey of Indian History Part 2

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 1 से आगे
चन्दू को अपने सामने एक निवस्त्र महिला जो नेग्रिटो जाति की लग रही थी आती हुयी दिखायी दी चन्दू पहली बार किसी महिला को इस प्रकार देखकर हतपभ्र रह गया महिला के साथ एक शिकारी कुता था जो उसने चन्दू पर छोड दिया तथा पत्थर से बना एक कुल्हाड़ी नुमा शस़्त्र चन्दू पर चला दिया चन्दू ने घबराकर टाईममशीन का बटन वापस दबा दिया तो वो अपने काल में वापस आ गया। 
      चन्दू बेहद घबरा चुका था उसने अपने रूम में रखा पानी का एक गिलास एक झटके में पी लिया उसके बाद टाईम मशीन पर डीटेल बटन को दबाया ताकि वो इतिहास के जिस भाग से वापस जिन्दा बचकर आया उसकी डीटेल जान सके। 


    मशीन स्क्रीन पर लिखा था पुरापाषाणकाल की उस नेग्रिटो जाती की महिला ने जो शस्त्र चलाया वो हैन्ड एक्स था उसके हाथ में स्क्रैपर व कलेवर नामक अन्य अस्त्र भी थे।


 इसके बाद NEXT लिखा था जिज्ञासु चन्दू ने जैसे ही NEXT बटन को दबाया उसने अपने आप को एक गुफा में पाया उसने टाईम मशीन में स्थान के बटन को दबाया तो लिखा था भीमबेटका मध्यप्रदेश यहां चारों तरफ गुफायें थी जिनकी दिवारों पर भीति चित्र बने थे पर फिर सामने से एक शिकारी कुते के साथ निवस्त्र नेग्रिटो पुरूष को आते देख घबराये चन्दू ने वापसी का बटन दबा दिया। 


अब चन्दू समझ गया कि जैसे ही वो NEXT बटन को दबायेगा वो इतिहास के अगले भाग के किसी स्थान पर स्वत आ जायेगा। 
उसने डरते डरते एक बार फिर नेक्सट को दबाया तो राजस्थान के आदमगढ में अपने आप को पाया वहां के लोग पशुपालन कर रहे थे। 

चन्दू को अब याद आया इतिहास की मैडम चीख चीख कर पढाती थी कि राजस्थान के आदमगढ एंव बागोर में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं। उसने घड़ी में समय देखा तो 5000 ई0पू0 लिखा था। 
क्रमश......अगला भाग चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 Chandu Journey of Indian History Part 3 पढें।

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