Saturday, December 25, 2021

RPSC & RSMSSB हिन्दी के महत्वपूर्ण विगत परीक्षाओं के प्रश्नों का सग्रंह

 हिन्दी के महत्वपूर्ण विगत परीक्षाओं के प्रश्नों का सग्रंह

मेरे यूटयूब चैनल जिन पर इन प्रश्नों को समझाया गया है का लिंकः-

https://www.youtube.com/channel/UCGD1-I0-jh2HtJfDHli_glg

मेरे टेलीग्राम चैनल का लिंक:- https://t.me/rpscbank

Download PDF files of Hindi RPSC & RSMSSB Questions:-

हिन्दी भाग 1

Friday, January 10, 2020

राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-06-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 6

-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-06-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 6
दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें 

1. राजस्थान में कपडे की मदो की बुनाई के लिए लेटा, माॅगरोल व सालावास जाने जाते है।

2. अजरक प्रिंट का संबंध बाडमेर जिले से है।
3. मीनाकारी की थेवा कला का संबंध प्रतापगढ से है।
4. मुरकीयाॅ कान में पहनी जाती है।
5. राजस्थान में पोमचा महिलाओं की ओढनी को कहाॅ जाता है।
6. लपा-लपी, किरण एवं बांकडी यह सब गोटे के विभिन्न प्रकार है।
7. दुल्हा-दुल्हन के विवाह की जूतियों को बिनोटा कहते है।
8. उदयशाही, अमरशाही, विजयशाही और शाहजहानी राजस्थानी पगडीयों की शैलिया है।
9. सांगानेर में राष्ट्रीय हस्त शिल्प कागज संस्थान की स्थापना की गई थी।
10. जयपुर ब्लू प्रोटी शैली की दस्तकारी के लिए प्रसिद्व है। जिसका उद्भव पर्शिया (ईराना) में हुआ।



इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/1rq12GQUTJh5ZXp5a9oG3cBIpKOEbAJQv/view?usp=sharing

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राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-05-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 5

-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-05-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 5
दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें 

1. चांकन परियोजना बूॅदी जिले में स्थित है।

2. ओरई परियोजना चितौडगढ जिले में स्थित है।
3. बेधाली परियोजना बाॅरा जिले में स्थित है।
4. राजस्थान में झरनों से सिंचाई बाॅसवाडा में की जाती है।
5. बाॅकली बाँध जालोर में स्थित है।
6. नारायण सागर बाँध अजमेर में स्थित है।
7. ओखला बेराज परियोजना से भरतपुर जिले में सिंचाई होती है।
8. बहुउद्वेशीय नदी घाटी परियोजना को आधुनिक भारत के मंदिर जवाहरलाल नेहरू ने कहाॅ था।
9. कालख सागर बाँध जयपुर जिले में स्थित है।
10. काला खो बाँध दौसा जिले में स्थित है।



इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/1ZgX0QSZFK0j6lH-rpbvrXIUdAu_CJGp2/view?usp=sharing

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राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-04 Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 4

-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-04-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 4
दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें 

1. पार्वती बाँध धौलपुर जिले में स्थित है।

2. मोरेल बाँध दौसा में स्थित है।
3. छापी परियोजना झालावाड जिले में स्थित है।
4. सोम-कमला अम्बा परियोजना बाॅरा जिले में स्थित है।
5. सावन भादो परियोजना बाॅरा जिले में स्थित है।
6. सोम-कागदर परियोजना उदयपुर जिले में स्थित है।
7. बीसलपुर योजना एक पेयजल एवं सिंचाई परियोजना है।
8. इंदिरा गाँधी नहर क्षेत्र विकास कार्यक्रम विश्व बैंक की सहायता से चलाया जा रहा है।
9. विलास सिंचाई परियोजना बाॅरा जिले से संबंधित है।
10. नर्मदा परियोजना से जालोर व बाडमेर जिले में सिंचाई होती है।


इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/1WZ__lf98CZ7IjPabZQEamhq6UbuTOg17/view?usp=sharing

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Monday, September 30, 2019

-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-03ःः-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 3

-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-03ःः-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 3
दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें 

1. इराडी आयोग रावी व्यास नदी जल विवाद के लिए गठित किया गया है।
2. भाखडा नाँगल परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 22.15 प्रतिशत है।
3. पोग बाँध व्यास नदी पर बनाया गया है।
4. राजस्थान में मिट्टी का बना बाँध पाँचना बाँध है।
5. पाँचना बाँध करौली जिलें में गुढला गाॅव के नजदीक है।
6. माही बजाज सागर परियोजना की विधुत उत्पादन क्षमता 140 मेगावाट है।
7. बीसलपुर बाँध टोंक जिले में बनास नदी पर स्थित है।
8. गाँधी सागर बाँध मध्यप्रदेश में चम्बल नदी पर स्थित है।
9. भाखडा नाँगल परियोजना भारत की सबसे बडी नदी घाटी परियोजना है।
10. कमांड क्षेत्र विकास कार्यक्रम का उद्धेश्य सिंचाई क्षमता का सृजन है।
इसके साथ साथ आप इस कैप्सूल में जो फोटो देख रहे हैं उसमें भी दस प्रश्न बोनस के दिये गये हैं आप इमेज से भी 10 प्रश्नों के नोटस बना सकते हैं।
इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/14qXPtImnhZc3p2HWcdRbqIQ0YTvO4SMv/view?usp=sharing

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-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-02ःः-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 2

दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें। 

Rajsthan General Knowledge Capsule 1
-ःः राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-02ःः-Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 2
1. चम्बल सिंचाई परियोजना राजस्थान-मध्यप्रदेश की है।
2. राणा प्रताप सागर बाँध चितौडगढ जिलें में रावतभाटा के पास चम्बल नदीं पर चुलीयाॅ जलप्रताप के नजदीक बनाया गया है।
3. जवाहर सागर बाँध (कोटा बाँध ), बोराबास (कोटा) के पास बना हुआ, राणासागर बाँध का पिकअप बाँध है।
4. जवाहर सागर बाँध का निर्माण चम्बल नदीं पर किया गया है।
5. राजस्थान में अणुशक्ति केन्द्र्र रावतभाटा में राणाप्रताप सागर बाँध पर है।
6. माही बजाज सागर परियोजना गुजरात व राजस्थान की संयुक्त परियोजना है।
7. माही बजाज सागर परियोजना बोरखेडा (बाॅसवाडा) में माही नदीं पर स्थित है।
8. जाखम परियोजना प्रतापगढ जिलें के अनुपगढ गाॅव के पास जाखम नदी पर है।
9. जाखम परियोजना आदिवासी कृषकों के लिए सर्वाधिक लाभप्रद है।
10. मेजा बाँध भीलवाडा जिलें में कोठारी नदी पर सिथत है।
इसके साथ साथ आप इस कैप्सूल में जो फोटो देख रहे हैं उसमें भी दस प्रश्न बोनस के दिये गये हैं आप इमेज से भी 10 प्रश्नों के नोटस बना सकते हैं।
इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/1R6fIDXv-QUdKWlFLStEKXJnkcNOl0aif/view?usp=sharing

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Wednesday, September 25, 2019

राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-01 Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 1

दस अति महत्वपूर्ण राजस्थान की विगत प्रतियोगी परीक्षाओं में आये प्रश्नों का आसान कैप्सूल के रूप में संग्रह रोज 2 कैप्सूल याद करें व 100 दिन में 2000 प्रश्नों का बैंक बनायें। 
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राजस्थान का जनरल नोलेज कैप्सूल-01 Rajasthan General Knowledge Questions Capsule 1

1. राजस्थान में कुल बोए गये क्षेत्र का 42.90 प्रतिशत सिंचित है।
2. राजस्थान में कुएँ व नलकूप से सिंचाईजयपुर में होती है।
3. गंग नहर सतलज नदीं पर फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला से से निकाली गई है।
4. गुडगाँव नहर हरियाणा-राजस्थान की संयुक्त परियोजना है। 
5. नवम्बर 1984 में राजस्थान नहर का नया नाम इंदिरा गाँधी नहर किया गया था।
6. इंदिरा गाँधी नहर (राजस्थान नहर) के प्रणेता श्री कँवर सैन थें।
7. इंदिरा गाँधी नहर का उद्गम स्थल हरिके बैराज है।
8. इंदिरा गाँधी नहर की कुल लम्बाई 649 किलो मीटर है।
9. इंदिरा गाँधी नहर में 07 लिफ्ट नहरें है।
10. इंदिरा गाँधी नहर का अंतिम छोर गडरा रोड बाडमेर तक है।
इसके साथ साथ आप इस कैप्सूल में जो फोटो देख रहे हैं उसमें भी दस प्रश्न बोनस के दिये गये हैं आप इमेज से भी 10 प्रश्नों के नोटस बना सकते हैं।
इन सभी प्रश्नों को एक साथ पीडीएफ फाईल के रूप में निम्न लिंक से डाउनलोड करें:-
https://drive.google.com/file/d/1-hU183HpKQcquv2yB6U7kzpN_gHdkvQw/view?usp=sharing

Rajsthan GK Capsule 2 Link      Rajsthan GK Capsule 3 Link
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Download Mini Notes of Indian History here:-
Mini indian History Notes

Tuesday, November 22, 2016

भारतीय इतिहास नोटस कैप्सूल -2 Indian History Notes Hindi Capsule 2

मेरे विगत आलेखों में मैने आपको बताया था आप भारतीय इतिहास के व्यापक सिलेबस को देखकर धबराएं नही तथा इसे 10-10 प्रश्नों के कैप्सूलों के रूप में बांट लेवे तथा एक-एक कैप्सूल याद करते जावें तो इससे आप भारतीय इतिहास पर अपनी मजबूत पकड़ बना सकतें है।

ऐसा इसलिये सभवं होता है कि 1-1 कदम चलने से हजारों मीलों कि दुरी पार हो जाती है तो आज इस श्रखलां का कैप्सूल सं. 3 प्रस्तुत है आपने यदि विगत 2 कैप्सूल डाउनलोड नही किये हैं तो पहले उनको निम्न लिकों से डाउनलोड करके याद कर लेवें:

भारतीय इतिहास नोटस कैप्सूल -2:Indian History Notes Hindi Capsule 2  
1.शेरशाह के समय में राज्य की आय का मुख्य स्त्रोत लगान था । 
2.शेरशाह की लगान व्यवस्था ‘‘रैयतबाड़ी’’ कहलाती थी ।
3.अकबर के समय का पहला विद्रोह 1564 में उजबेकों ने किया था । 
4. बीरबल की मुत्यु 1586 में ब्लुचियों के  विद्रोह में हुयी थी ।
5. जैन धर्म के आचार्य ‘‘हरीविजय सुरि’’ को जगतगुरू की उपाधि अकबर ने दी थी
6. मुहम्मद सैय्यद ;मीर जुमलाद्ध नामक फारसी व्यापारी नें शाहजहाॅं को कोहिनुर हीरा      भेंट किया था ।
7. वीरजी बोहरा ‘‘मुगलकाल में सूरत का एक प्रसिद्ध व्यापारी था 
8.जहांगीर ने रविवार व व्हस्पतिवार को पशु हत्या बंद करने की आज्ञा दी थी 
9. मुगल चित्रकला का सर्वाधिक विकास जहाॅंगीर के काल में हुआ था 
10. थियोफिजीकल सोसायटी की स्थापना 1875 में मैडम ब्लावत्सकी तथा कर्नल आल्काॅट नें न्यूयार्क में थी 
उपरोक्त 10 बिन्दूओं को याद करने के साथ साथ आप इतिहास को रोचक कहानी के रूप में निम्न लिकं पर जाकर पढ सकतें हैः
इतिहास का यह ब्लोग आपको कैसा लगता है अपने विचार कमेंट मे अवश्य दर्ज करें ताकी आपके सुझावों के आधार पर इस ब्लोग को नया रूप दिया जा सके।
आप इतिहास के अपने पंसदीदा टोपिक को कैप्सूल के रूप में बना कर मुझे  mahesh2073@yahoo.com पर शेयर कर सकते हैं चुनिदां कैप्सूलों को इस ब्लोग पर प्रकाशित किया जावेगा।
मेरे सिविल सेवा की तैयारी करने वाले पाठकों को आधुनिक भारत के इतिहास की तैयारी हेतु स्पैक्ट्रम की निम्न पुस्तक अवश्य पढने का सुझाव दिया जाता हैः-

Thursday, July 21, 2016

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 7 Chandu journey of Indian history part 7

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 से आगे । इस कहानी को भाग एक से पढने के लिये निम्न लिंक पर क्लीक करेंः- 

चन्दू इतिहास यात्रा भाग एकअगले दिन प्रातः जब चन्दू सोकर उठा तब चाय पीते-2 उसके मन में कल स्कूल में हूयी घटनाओं के विचार चल रहे थें तब अचानक उसके मन में ऋगवैदिक काल की यात्रा करने का विचार आया ताकि कल जो उसका चिंकी के साथ विचार विमर्श हुआ था उसके बारे में ओर ज्यादा जानकारी हो सके । 


 चन्दू ने अपनी टाईम मशीन में ऋगवैदिक सभ्यता का काल 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. फीड कर दिया तथा आखें बन्द करके वैदिक काल में जाने की प्रतिक्षा करने लगा ।
 जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुयी तब चन्दू ने आखें खोल कर टाईम मशीन के स्क्रीन पर देखा तो वहा एरर मैसेज फलैश हो रहा था कि ‘‘ आप 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. एक साथ 500 वर्ष का समय पहीं भर सकते कोई एक वर्ष भरें ।’’ 
 तब चन्दू ने 1200 ई. पू. भरा तथा पलक झपकते ही अपने आप को एक विशाल उफनती हुयी नदी के किनारे पाया चन्दू ने मन में सोचा ‘‘ शायद यही सरस्वती नदी होगी ।’’ पास ही एक पर्वत शिखर था जिसका नाम मूजवन्त संस्कृत में लिखा था चन्दू को याद आया कि इतिहास में पढाया गया था कि ऋगवेद में हिमालय ओर उसकी चोटी मूजवन्त का उल्लेख मिलता है ।
 अचानक सामने से एक विशाल लश्कर आता दिखायी दिया तो चन्दू ने अदृश्य होने का बटन दबा दिया तथा लश्कर में शामिल हो गया । समूह के लोग संस्कृत में बात कर रहे थे तथा सौभाग्य से चन्दू की संस्कृत काफी मजबूत थी फिर भी उनकी संस्कृत भाषा वर्तमान में चन्दू के पाठयक्रम में पढाये  जाने वाली संस्कृत से काफी क्लीष्ट प्रतित हो रही थी । 
 यह लश्कर किसी ‘‘विशपती’’ का था चन्दू को याद आया कि वैदिक काल में कई गावों का समूह विश कहलाता था तथा इसका मुखियाॅ ‘‘विशपती’’ होता था । ये विशपती किसी अनु नामक कबीले से सबंधित थे जो जनपति से मिलने जा रहे थे । 
 चन्दू को इतिहास की मैडम श्रीमती लोपामुद्रा अययर की बातें याद रही थी कि विशों का का समूह जन होता था तथा जन का अधिपती जनपति होता था । 
चन्दू लश्कर के साथ जनपति के दरबार में पहुच गया जहा बहुत से विशपति थे तथा राजा ( जनपति ) को गोप्ता जनस्य तथा पुराभेता आदि नामों से सबोंधित कर रहे थे । चन्दू ने राजदरबार में सभा, समिति, विदथ तथा गण जैसी कबीलाई परिषदें देखी जिनमें महिलाए भी उच्च पदों पर आसीन थी । 
 चन्दू घूमता-2 सैनिक विभाग में पहुच गया वहा उसने शर्ध, व्रात और गण आदि सेना की ईकाईया देखी तथा काफी समय व्यतित हो जाने व भुख लगने से उसने टाईम मशीन में वापस जाने का बटन दबा दिया । 
 शेष अगले भाग में जो 20 दिन -30 दिन में प्रकाशित होगा तब तक श्रखंला आपको कैसी लगी कमेटं में अवश्य दर्ज करें ।

Sunday, April 24, 2016

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस Indian History Short Notes in Hindi 33 Page Free PDF

भारतीय इतिहास की फटाफट तैयारी के लिये 33 पृष्ठ के अति लघु नोटस

यदि आपने भारतीय इतिहास की कम तैयारी की है या आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास के केवल अतिमहत्वपूर्ण प्रश्नों को ही याद करना चाहते हैं तो यह अति महत्वपूर्ण 33 पृष्ठों के फटाफट नोटस आपकी बेहद मदद कर सकते हैं।
प्रश्न-उतर एंव उनकी व्याख्या के रूप में यह छोटे नोटस इतने अच्छे हैं कि आप इनको डाउनलोड करने के बाद कमेंट में थैंक यू लिखना भूल ही नहीं सकते।
इस लिंक पर क्लीक करके डाउनलोड करें:-
यदि आप विस्तृत तैयारी के लिये नोटस चाहते हैं तो निम्न लिंक से मुफत डाउनलोड कर सकते हैंः-
तथा इन 33 पृष्ठों के नोटस की शैली की बढी पुस्तक लेना चाहते हैं तो इस लिंक पर जा सकते हैंः-  
Best Indian history notes in question - answer and explanation style in Hindi, this 33 page short pdf in Hindi give you a quick preparation of Indian history .
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Thursday, March 17, 2016

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 Chandu journey of Indian history part 6

Chandu journey of Indian history part 6 
इस कहानी को भाग एक से पढने के लिये निम्न लिंक पर क्लीक करेंः-
चन्दू इतिहास यात्रा भाग एक
चिंकी ने वापस लौटने के पश्चात अगले दिन स्कूल में चन्दू को उसकी टाईम मशीन वापस कर दी । 

विद्यालय के सातवें कालांश में विद्यार्थियों को पुस्तकालय ले जाने का नियम था उसमें चन्दू ने पुस्तकालयध्यक्ष महोदय से पूछा ‘‘सर क्या अपने पुस्तकालय में विदेशी इतिहास का कोई अनुवादित ग्रन्थ है’’ ? दरअसल चन्दू की मशां थी कि वो विदेशी भाषा के इतिहास ग्रन्थ की सहायता से किसी विदेशी संस्कृति का काल जानकर उसकी यात्रा कर लेगा । 


पुस्तकालय अध्यक्ष रेंचो सर उसकी बात सुनकर मुस्कराए तथा बोले ‘‘चन्दू क्या तुम ईरानी भाषा के प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ का हिन्दी अनुवाद पढ़ना चाहोगे ? 
 चन्दू के सहमति दर्शाने पर सर ने उसे एक पुस्तक निकाल कर दी जिसका नाम था ‘‘अवेस्ता’’ मूल रूप से ईरानी भाषा में लिखे इस ग्रन्थ को पढ़कर चन्दू आश्चर्यचकित हो उठा क्यों कि इसकी ज्यादातर बातें ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलती थी । 
 अब चन्दू के समझ में आया कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को (जो ऋग्वैदिक सभ्यता के निवासी थे) मध्य एशिया (बैक्द्रिया या ईरान के आस पास के क्षेत्र) से आया हुआ मानते थे । 
चन्दू चिल्लाया ‘‘चिंकी आओ में तुम्हें सबूत दिखाता हूं कि क्यों प्रो. मैक्समूलर आर्यों को मध्य एशिया (बैक्द्रिया) से आया मानते थे ।’’ चिंकी भी वैदिक सभ्यता पर एसाइनमेंट लिख रही थी इसलिए चन्दू की बात से उत्साहित होकर दोड़कर आयी तब चन्दू ने बताया कि ईरानी भाषा का प्राचीनतम ग्रन्थ ‘‘अवेस्ता’’ अपने ‘‘ऋग्वेद’’ से मिलता जुलता है । 
 चिंकी बोली ‘‘परन्तु चन्दू बाल गंगाधर तिलक तो आर्यों को उतरी ध्रुव से आया मानते थे ।’’ 
चन्दू हॅंसा ‘‘चिंकी जहां भालु भी मुश्किल से मिलते हैं ऐसे क्षेत्र से आर्य कैसे आए होगें ।’’ 
 चिंकी बोली ‘‘हां वो तो है स्वामी दयानदं सरस्वती ने वैदिक सभ्यता का अध्ययन किया था वो आर्यों को तिब्बत से आया मानते थे ।’’ 
 तब चन्दू बोला चलो इतिहास की मैडम से विषय की जानकारी लेते है। वो मिलकर इतिहास की मैडम श्रीमती लोपामुद्रा अय्यर के पास गये तथा उनसे आर्यों के उद्गम स्थल के बारे में प्रकाश डालने की प्रार्थना की । 
 श्रीमती लोपामुद्रा बोली ‘‘यह सही है कि श्री बालगंगाधर तिलक ने आर्यों को तिब्बत व श्री दयानदं सरस्वती ने उतरी ध्रुव का निवासी बताया है परन्तु इस बारे में अन्य मत भी है जैसे डा. अविनाश चन्द दास इन्हे सप्त सैन्धव प्रदेश से आया बताते हैं तो गंगानाथ झा ब्रह्यर्षि देश से आया बताते हैं । 
 चन्दू बोला ‘‘पर मैडम उतरी ध्रुव में तो भालु रहते हैं सप्त सैन्धव देश व ब्रह्यर्षि देश कौनसे देश है ये कहाॅं पर स्थित हैं ? मैडम हंसी ‘‘चन्दू ये तो मैं भी नहीं जानती पर इस बारे में विदेशी विद्ववानों के भी मत हैं नेहरिगं व प्रो. गार्डन आर्यों को दक्षिणी रूस से आया मानते हैं प्रो. पेन्का जर्मनी से आया मानते हैं ।
 वस्तुत अधिकाशं विद्ववान प्रो. मैक्समूलर की बातों से सहमत है कि आर्य मध्य एशिया के निवासी थे । 
 इतने में स्कूल की छुट्टी हो गयी । 
 श्रखंला आपको कैसी लगी कमेटं में अवश्य दर्ज करें ।
क्रमशः----- शेष Link for next part
चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 7 (click on link to read next)
मे पढे । 
Avesta relation with righveda ancient Indian history notes in Hindi, chandu history journey.

Thursday, February 18, 2016

केवल 30 दिनों में भारतीय इतिहास की तैयारी करने हेतु कैप्सूल श्रखंला का कैप्सूल प्रथम Prepare Indian history in 30 Days ( Hindi me) Capsule 1

जब आप बीमार हो जाते हैं तो चिकित्सक आपको ठीक होने के लिये कैप्सूल देता है कि एक कैप्सूल रोज खाना हेै व तीस दिन तक खाने से उल्लेखनिय फर्क महसुस होगा। 

क्या आप सभी 30 कैप्सूल एक साथ खाकर एक ही दिन में स्वस्थ हो सकते हैं? 
क्या आप 2-3 कैप्सूल खाकर स्वस्थ हो सकते हैं? 
आप मानते हैं कि इन प्रश्नों का उतर ना में ही है तो लिजिये आज हम आपको भारतिय इतिहास के 90 कैप्सूल की श्रखंला देते हैं। प्रत्येक कैप्सूल में 15 अतिमहत्वपूर्ण प्रश्न है जो विगत सालों में किसी न किसी प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे गये हैं। 
प्रत्येक कैपसूल में 15 अति महत्वपूर्ण प्रश्न अत्यंत सरल तरीके से दिये गये हैं जिनको याद रखना अत्यंत सरल है। 
 तो आप किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा के लिये भारतीय इतिहास की झटपट तैयारी करना चाहते हैं तो इन कैप्सूलों में से रोज 3 कैप्सूल के 15*3=45 प्रश्न याद कर लेवें तो 30 दिन के कम समय में आप 1350 अति महत्वपूर्ण प्रश्न याद कर लेगें तथा ज्यादा आत्मविश्वास से प्रतियोगी परीक्षा में भाग ले सकेगें। 
लिजिये हाजिर है कैप्सूल श्रंखला का कैप्सूल 1 तथा इसके 15 प्रश्नः- 
1. हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग से सबंधित थी। 
2. सिन्धु घाटी सभ्यता में घोड़े के अवशेष नहीं मिलते हैं। 
3. पाण्डीचेरी में फ्रासं का उपनिवेश था। 
4. नृत्य करते हुये नटराज की मूर्ति का संबध चोल वंश से था। 
5. महाबलीपुरम मंदिर पल्लव वंश से संबधित है। 
6. पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम थी। 
7. प्रथम रेलवे लाईन लार्ड डलहौजी ने 1853 में मुम्बई से ठाने के बीच बिछाई थी। 
8. नादिरशाह ने कन्नौज पर चढाई नहीं की थी। 
9. राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरूद्व कार्य किया। 
10. हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो ने यंग बंगाल मूवमेंट की स्थापना की थी। 
11. लार्ड कर्जन के कार्यकाल में कलकता में विक्टोरिया हाल का निमार्ण हुआ था। 
12. भारत छोड़ो आंदोलन नेतृत्व विहीन विद्रोह कहलाता है। 
13. एडवर्ड ल्यूटिऐन्स व एडवर्ड बेकर ने नई दिल्ली की रूपरेखा बनायी।
14. बिहार राज्य का नाम बौद्व मठ से बना है। 
15. बाबरनामा बाबर की आत्मकथा के रूप में है।

अगला कैप्सूल भाग 15 दिवस में प्रकाशित होगा।
हिन्दी में मुफत पीडीएफ नोटस यहां से डाउनलोड करेंः- 
हिन्दी की भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक हेतु यहां जावेंः- 

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Thursday, January 7, 2016

हिस्ट्री आफ राजपुताना वोल्यूम । पं गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखित पीडीएफ के रूप में पढें। History of Rajputana By Pandit Gourishankar Hirachand Ojha PDF ( Hindi)

राजस्थान राजपुतों का देश रहा है यहां का इतिहास बहुत ही गौरवशाली होने के साथ साथ मध्यकालीन भारत के पुरे इतिहास की जानकारी सजोंयें हुये है अतः आप यदि राजस्थान स्लेट, राजस्थान स्कूल व्याख्याता, राजस्थान के इतिहास से सबंधित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहें हैं आपके लिये पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखे गये राजस्थान के इतिहास के सभी भागों को पढना अति आवश्यक है।
   साथ ही आई.ए.एस व अन्य राज्यों के इतिहास के विधार्थी भी इस पुस्तक को अवश्य पढें क्यों कि यह केवल राजपुताना का इतिहास नहीं है इसमें मध्यकालीन भारत के इतिहास की जानकारी इतनी रोचक भाषा में है कि आप पढकर रोमांच व आनंद महसुस करेगें जो गाइडों से पढने में नहीं आ सकता।
    जैसा कि मेरा मानना है प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये पासबुक्स व गाईडों का सहारा न लेकर इन प्राचीन दुलर्भ पुस्तकों को पढना आपको ज्यादा तैयारी करवा सकता है।
   यह पुस्तक निम्न लिंक पर जाकर पढ सकते हैं व पीडीएफ के रूप  में ले सकते हैं।
यह 496 पेज की पुस्तक 20 एमबी की है इसलिये डाउनलोड होने व ओपन होने में आपके इन्टरनेट की स्पीड के अनुसार समय लग सकता है।
Link:-
हिस्ट्री आफ राजपुताना वोल्यूम । पं गौरीशंकर हीराचंद ओझा हिन्दी

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Thursday, December 17, 2015

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा Travels in India By When Tsang Hindi pdf

चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा 
प्रिय साथियों
आज में आपको 1972 में प्रकाशित एक बहुत ही दुर्लभ पुस्तक का अध्ययन करवाना चाहता हुं इस पुस्तक का नाम है चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा
इस पुस्तक के 443 पेजों में हिन्दी में सन 629 से 645 तक ही चीनी यात्री ह्नेनसांग की भारत यात्रा का अत्यंत रोचक वर्णन है।
इतिहास की पुस्तकों का रटटा मारने से आप जो सीख नहीं सकते वो इस पुस्तक को पढकर सीख सकते हैं।
यह पुस्तक मूल रूप  से Travels in India By When Tsang का हिन्दी अनुवाद है जो आप निम्न लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं 
Download Travels in India By When Tsang Hindi pdf
अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकेंः-
हुंमायुनामा हिन्दी में।

Rajasthan history (Itihas) in Hindi pdf

or 
You may also understand Hindi itihas by read this free series of history:-
चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा।
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Tuesday, June 16, 2015

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 5 Chandu Journey of Indian History Part 5

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 4 से आगे
Chandu Journey of Indian History Part 5
चिकीं ने देखा वह एक किलेबंद शहर मे है जिसके चारो तरफ खाई खुदी हुई है वहा बडे बडे कच्ची मिटटी के बने हुए मकान थे कुछ मकान गोलाकार गडडे नुमा थे । चिंकी जोरवे संस्कृति के सबसे बड़े नगर दैमाबाद को देखकर आश्चर्य चकित थी कि नगर मे लोग घोडे की सवारी नही कर रहे थे इससे उसको समझ मे आया कि ताम्रपाषण काल के लोग घोडे से परिचित नही थे ।
 औरते लाल मिटटी से पुती हुई काली चित्रकारी की हुई टोटी लगी हुई मिटटी की मटकियो मे पानी ला रही थी बर्तनो पर डीजाईन समान्तर लाईनो के रूप मे ज्यामितिय बने थे । 
एक जगह चिंकी ने देखा कि काफी स्त्री पुरूष इकठठे हुए है नजदीक से देखने पर ज्ञात हुआ कोई मर गया था मृतक को एक बडे कलश मे रखकर घर के आंगन मे दफनाया जा रहा था कब्र मे भी मिटटी की हंडिया व तांबे की कुछ वस्तुएं रखी जा रही थी जो उनकी बातचीत से लग रहा था कि मृतक के परलोक मे काम आवे इसके लिए ये वस्तुए मृतक के साथ मे दफनायी जा रही थी मृतक का शरीर उत्तर दक्षिण की तरफ रखा गया था । चिंकी को एक आश्चर्य यह भी था आज भी ठेठ महाराष्ट्र की संस्कुति दैमाबाद की जोरवे संस्कुति से मेल खा रही थी । खासकर के लाल मिटटी पर काली ज्यामिति वाले टोटी नुमा बर्तन आज भी महाराष्ट्रा के गांवो मे चिंकी ने देखे थे । 
( चिंकी बम्बई की रहने वाली थी उसे आपने मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म मे देखा होगा ) । अन्य वस्तुए जो चिंकी ने दैमाबाद मे देखीः- मछली पकडने के काटे मातृदेवी की पूजा व वृषभ की मूर्ति की पूजा ( जो वर्तमान काल मे भी शिव-पार्वती व गौ-पूजन के रूप् मे की जाती है ) कांसे की वस्तुए एक पाचं कमरो का मकान देखा जिसमे 4 कमरे आयताकार व एक वृताकार था ।
 अब चिंकी ने टाईम मशीन मे अन्य समान्तर शहरो के नाम देखे तो राजस्थान के तीन ताम्रपाषण कालीन शहरो के नाम उसे फलैश होते हुए दिखे । 1 गिलुण्ड 2 आहर ( तम्बाबती ) 3 गणेश्वर चिंकी दैमाबाद का यात्रा से उब चुकी थी इसलिए उसने गणेश्वर की यात्रा हेतु टाईम मशीन का बटन दबा दिया । पलक झपकते ही चिंकी ने अपने आपको प्राचीन गणेश्वर स्थल मे पाया उसने देखा कि तांबे की वस्तुओ की आपूर्ति हडप्पा सभ्यता के लोगो को करनेे के लिए व्यापारी लोग एकत्रित हुए है।
 चिंकी को घर वापस लौटने की जल्दी थी फिर भी उसने मशीन की तरफ अन्य समान्तर शहरो को देखा तो गुन्नेरिया, मालबा व कायथा ( मध्यप्रदेश ) नाम भी फलैश हो रहा था परन्तु चिंकी मालबा गुन्नेरिया व कायथा नही गयी क्योंकी एक तो वह काफी थक चुकी थी दुसरे उसे याद भी था कि मालबा मे ताम्रपाषाण काल के सबसे उत्कृष्ठ मृदभाण्ड पाये जाते है । व गुन्नेरिया मे सबसे अधिक मात्रा मे ताबे व चांदी की वस्तुए मिली है यदपि उसकी इच्छा गुन्नेरिया ( मध्यप्रदेश ) मे मिले 424 तांबे के औजार व 102 चांदी की पतरे नुमा वस्तुए देखने की परन्तु उसे घर पहुचने की जल्दी भी इसलिए उसने टाईम मशीन पर वापसी का बटन दबा दिया ।
क्रमशः----- शेष चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 6 मे पढे ।
Next part:-
http://www.indianhistorynotes.in/2016/03/6-chandu-journey-of-indian-history-part.html
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Friday, October 17, 2014

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा-4 Chandu Journey of Indian History Part 4

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 से आगे 
चन्दू बोला नहीं चिंकी तुम भुल गयी इतिहास की मैडम ने बताया तो था कि पिकलीहल में शंख के बने घर पाये गये हैं।
चन्दु से यात्रा वृतान्त सुनकर चिंकी की भी इच्छा होने लगी कि वो भी भारतीय इतिहास के ताम्र पाषाण काल की यात्रा करके आये। उसने चन्दू से उसकी टाईम मशीन एक दिन के लिए उधार मांग ली। चन्दू ने सहर्ष उसे देते हुए कहा देखो चिंकी उस काल के लोग यदपि मानव शिकार नहीं करते थे फिर भी तुम्हें अनजान देख कर तुम पर हमला कर सकते हैं। इसलिए इस मशीन में एक अदृश्य बटन भी है तुम उसी का इस्तेमाल करके यात्रा करना जिससे तुम उन्हे देख सकोगी पर वे तुम्हे नहीं देख सकेगें। 

चिंकी बहुत खुश हुयी उसने चन्दू से घडी लेकर अपनी कलाई पर बांध ली तथा मशीन में 2100ई.पू. का समय भर दिया तो स्क्रीन पर अनेक ओप्शन फलैश होने लगे। 
चिंकी स्क्रोल करके इन ओप्शन को पढने लगी । 
मशीन में लिखा था आपने जो समय भरा है वो जोर्वे संस्कृति या ताम्र पाषाण काल का समय है इसके इतने स्थल यात्रा के लिए उपलब्ध है आप जोर्वे संस्कृति के कौनसे स्थल की यात्रा करना चाहेगें 
 जोर्व (महाराष्ट्र) नेवासा (महाराष्ट्र) दैमाबाद (महाराष्ट्र) इनामगांव (महाराष्ट्र) सोनगांव (महाराष्ट्र) चन्दोली (महाराष्ट्र) नबदाटोली (महाराष्ट्र) अहार (ताम्बवती भी कहते हैं) 
 इतने ओप्शन देखकर चिंकी ने अपने दिमाग पर जोर लगाया तो उसे याद आया कि इतिहास की मैडम कहती थी कि जोर्वे संस्कृति के स्थलो में सबसे बडा दैमाबाद है तो उसने दैमाबाद ओप्शन का चयन कर लिया तथा साथ ही अदृश्य होने का बटन भी दबा दिया। 
क्रमश......

चन्दु की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 5 Chandu Journey of Indian History Part 5

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Thursday, September 25, 2014

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 Chandu Journey of Indian History Part 3

चन्दू समझ गया कि वो मध्य पाषाणकाल में आ गया है। उसने अपनी घड़ी में बटन दबाया तो वो एक स्थान पर था जहां भी प्राचीन लोग अपने पालतु पशुओं के साथ दिखे चन्दू ने अपनी टाईम मशाीन में इस स्थान का नाम देखा तो लिखा था सराय नाहर। 
चन्दू बेहद रोमांचित था क्यों कि इस टाईम मशीन से तो उसे इतिहास जैसा बोर लगने वाला विषय अपने आप याद होता जा रहा था उसे सराय नाहर पढते ही याद आ गया कि सराय नाहर तथा महदहा जगह जो यूपी के प्रतापगढ जिले में है से मध्य पाषाण काल के मानवों का पहला शारिरीक अस्थिपंजर मिला था।
 अगली बार नेक्सट बटन दबाने पर चन्दू कोल्डिहवा नामक स्थान पर आ गया वहां के लोग चावल खा रहे थे पहली बार चन्दू ने अपनी इतिहास यात्रा में ऐसा स्थल देखा जहां चावल का प्रयोग हो रहा था। अब लोग हिसंक नहीं थे इसलिये चन्दू भी उनमें घुलमिल कर चावल खाने लगा। उबले हुये फिके चावल चन्दू को अच्छे तो नहीं लगे पर यह अवश्य याद हो गया कि इलाहाबाद के पास कोल्डिहवा स्थल से चावल के प्राचीनतम साक्ष्य किस प्रकार मिले होगें। 

 चन्दू पेदल ही चल रहा था उसने अपनी टाईम मशीन की स्क्रीन पर इस काल के अन्य स्थलों को देखा तो बुर्जहोम गुफकराल चिरांद पिकलीहल तथा मेहरगढ लिखे थे। 

चन्दू ने एक एक करके इन स्थानों की यात्रा कि तो देखा कि बुर्जहोम में गडडे जैसे घर थे लोग खेती भी कर रहे थे प्रत्येक घर में कुता पाला हुआ था परन्तु यह क्या चन्दू एक कुते के चीखने की आवाजें सुन कर पसीज गया उसने पता किया तो उसका दिल जैसे बेठने लगा लोगों ने बताया कि यहां बुर्जहोम में मालिक के मर जाने पर कुते को भी साथ ही दफनाया जा रहा है। 
चन्दू का मन बुर्जहोम से भर गया उसने नेक्सट स्थल का बटन दबा दिया तथा चिरांद में आ गया। चिरांद के लागों के पास हिरण की हडिडयों के बने बहुत से उपकरण थे। 
चन्दू वापस अपने काल में आ गया अगले दिन वो स्कूल गया तो उसने अपने साथियों को अपनी ईतिहास यात्रा के बारे में बताया उसकी सहपाठी चिंकी को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ ।
 चिंकी बहुत तेज दिमाग की लड़की थी उसे आपने मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म में देखा होगा। चिकीं ने चन्दू की परीक्षा लेने की ठान ली ताकि पता चले कि वो सचमुच किसी ईतिहास यात्रा से जाकर आया है या नहीं ।
 लंच टाईम में चिंकी ने चन्दू को पूछा “चन्दू तुम पिकलीहल भी गये थे क्या?” 
चन्दू बोला “ओफ कोर्स” 
चिंकी बोली “तो वहां के घर भी गडडे में बने हुये थे क्या?” 
चन्दू ने कहां “नहीं चिंकी वहां तो मैने शंख के बने हुये घर देखे।” 
चिंकी बोली “तुं मुझे मामू तो नही बना रहा” 

क्रमश......अगला भाग Chandu journey of Indian History part 4 पढें।

Thursday, September 18, 2014

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 2 Chandu Journey of Indian History Part 2

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 1 से आगे
चन्दू को अपने सामने एक निवस्त्र महिला जो नेग्रिटो जाति की लग रही थी आती हुयी दिखायी दी चन्दू पहली बार किसी महिला को इस प्रकार देखकर हतपभ्र रह गया महिला के साथ एक शिकारी कुता था जो उसने चन्दू पर छोड दिया तथा पत्थर से बना एक कुल्हाड़ी नुमा शस़्त्र चन्दू पर चला दिया चन्दू ने घबराकर टाईममशीन का बटन वापस दबा दिया तो वो अपने काल में वापस आ गया। 
      चन्दू बेहद घबरा चुका था उसने अपने रूम में रखा पानी का एक गिलास एक झटके में पी लिया उसके बाद टाईम मशीन पर डीटेल बटन को दबाया ताकि वो इतिहास के जिस भाग से वापस जिन्दा बचकर आया उसकी डीटेल जान सके। 


    मशीन स्क्रीन पर लिखा था पुरापाषाणकाल की उस नेग्रिटो जाती की महिला ने जो शस्त्र चलाया वो हैन्ड एक्स था उसके हाथ में स्क्रैपर व कलेवर नामक अन्य अस्त्र भी थे।


 इसके बाद NEXT लिखा था जिज्ञासु चन्दू ने जैसे ही NEXT बटन को दबाया उसने अपने आप को एक गुफा में पाया उसने टाईम मशीन में स्थान के बटन को दबाया तो लिखा था भीमबेटका मध्यप्रदेश यहां चारों तरफ गुफायें थी जिनकी दिवारों पर भीति चित्र बने थे पर फिर सामने से एक शिकारी कुते के साथ निवस्त्र नेग्रिटो पुरूष को आते देख घबराये चन्दू ने वापसी का बटन दबा दिया। 


अब चन्दू समझ गया कि जैसे ही वो NEXT बटन को दबायेगा वो इतिहास के अगले भाग के किसी स्थान पर स्वत आ जायेगा। 
उसने डरते डरते एक बार फिर नेक्सट को दबाया तो राजस्थान के आदमगढ में अपने आप को पाया वहां के लोग पशुपालन कर रहे थे। 

चन्दू को अब याद आया इतिहास की मैडम चीख चीख कर पढाती थी कि राजस्थान के आदमगढ एंव बागोर में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं। उसने घड़ी में समय देखा तो 5000 ई0पू0 लिखा था। 
क्रमश......अगला भाग चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 3 Chandu Journey of Indian History Part 3 पढें।

Saturday, August 9, 2014

वाराणासी (काशी) का इतिहास Varanashi (Kashi) ka Itihas by Dr. Motichandra

प्रिय पाठको, 

आज आपको वाराणासी (काशी) का इतिहास पीडीएफ के रूप में ओनलाईन पढने को दिया जा रहा है। 
यह इतिहास आपको उपन्यास की तरह पढना चाहिये। केवल पुस्तकें सर्च करके डाउनलोड करने से आप इतिहास को नहीं सीख सकते न ही इतिहास को रटना चाहिये आपको ये सब प्राचीन पुस्तके रूचि लेकर उपन्यास की तरह पढनी चाहिये। 
वाराणासी (काशी) का इतिहास उतर प्रदेश पीएससी ( UPPSC , Uttar Pradesh PSC ) व उतराखंड पीएससी  ( UKPSC, Uttarakhand PSC )के लिये विशेष उपयोगी है परन्तु अन्य राज्यों के पीसीएस विधार्थियों व आईएएस के विधार्थियों को भी इसे अवश्य पढना चाहिये क्यों कि इतिहास चाहे किसी भी राज्य का हो उसमें पुरे भारत के तत्कालिन ऐतिहासिक तथ्य आ जाते हैं। 

Click here to read online Varanashi (kashi) ka Itihas

उतर प्रदेश पीसीएस के लिये अन्य उपयोगी पुस्तकेः-
उतरप्रदेश पीसीएस के लिये आप अन्य उपयोगी पुस्तके ओनलाईन मंगवा कर पढ सकते हैं 
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Tuesday, June 24, 2014

चन्दू की भारतीय इतिहास यात्रा भाग 1 Chandu Journey of Indian History Part 1

चन्दू कौन है? 
चन्दू एक काल्पनिक इतिहास पुरूष है।दरअसल जब मैं आर.ए.एस की तैयारी करता था तब मुझे लगता था कि हम इतिहास की अधिंकाश बातें भुल जाते हैं क्यों कि वो हमें बोर करती है परन्तु किसी फिल्म या उपन्यास की बाते हमें अक्सर याद रहती है।
मेरे आदरणीय गुरूजी श्री मनीराम सेतिया भी हमें बचपन में कहा करते थे कि ‘‘कैमिस्ट्री और हीस्ट्री है ऐसी बेवफा। कि रात को पढो तो सुबह सफा।।’’ इसी समस्या को हल करने के लिये मैने एक काल्पनिक पात्र चन्दू की रचना की है जो पुरा पाषाण काल से लेकर भारत की आजादी तक यात्रा करता है उसकी इस रहस्य रोमांच से भरपुर यात्रा हमें बरबस ही भारतीय इतिहास सीखा जाती है इस रोचक उपन्यास को मेरे पाठकों की मांग पर धारावाहिक रूप से उपलब्ध करवाया जा रहा है।
कृपया इस सामग्री को ब्लोग लेखक महेश चन्द्र कौशिक की लिखित अनुमति के बगैर अन्य प्रकाशित नहीं करें क्यों कि यह सामग्री मेरी बौद्धिक सम्पदा है।आप इसे फेसबुक पर शेयर कर सकते हैं। 
उपन्यास को इस ब्लोग पर धारावाहिक के रूप में प्रकाशित किया जाना है परन्तु कृपया ध्यान रखें कि मेरे द्वारा 10 ब्लोग लिखे जाते हैं इसलिये एक भाग के प्रकाशन के बाद दुसरे भाग के प्रकाशन में 10 से 15 दिन का समय लग सकता है।
 कृपया 15 दिन में एक बार इस ब्लोग को अपडेट के लिये विजिट करें या ई मेल अपडेट के लिये सब्सक्रईब करे या फोलो करें ताकि आपको अगला अपडेट ई मेल से मिल सके।
चन्दू की इतिहास यात्रा 

चन्दू बचपन से ही विज्ञान मिथक कथाओं में रूचि रखता था। उसने टाईम मशीन के बारे में अनेक विज्ञान मिथक कथाओं में पढा था। टाईम मशीन एक ऐसी घड़ी होती है जिसको कलाई पर बांध कर उसमें लिखे सवंत को सेट करने पर आदमी उसी काल में पहुंच जाता है। 
चन्दू ऐसी ही किसी टाईम मशीन की तलाश में था तथा एक दिन जब वो टाईम मशीन के बारे में सोचते सोचते सो जाता है तो क्या देखता है कि अचानक ही टाईम मशीन उसके हाथ लग जाती है। 
चन्दू इसे अपनी कलाई पर बांध कर सोचने लगता है कि वो सबसे पहले किस काल की यात्रा करे उसे याद आता है कि पुरा पाषाण काल का समय 3500 ई0पू0 से 10000 ई0पू0 था इसलिये वो घड़ी में 5500 ई0पू0 भरता है।
 एक तेज झटके के साथ चन्दू अपने आप को एक नदी के किनारे पाता है। चन्दू की टाईम मशीन में यह भी सुविधा है कि वो किस स्थान पर है वो उसमें डीस्पले हो सकता है चन्दू स्थान डीस्पले बटन को दबाता है तो पल्लवरम (मद्रास के निकट ) अपने आप को पाता है। 
पास ही बह रही नदी में पत्थर के अनके गोल टुकड़े हैं जो उसे याद आते हैं कि इतिहास की मैडम इनके बारे में बताती थी ये टुकडे पेबुल कहलाते थे। 

चन्दू आज पेबुल को अपनी आंखों से देखकर रोमांचित हो उठता है।                      CLICK HERE TO READ PART 2 OF THIS STORY
Key words:- Chandu journey of indian history, Mahesh Kaushik Novel "Chndu ki Itihas yatra"
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